शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

नमन हमारा

लाली छाये दशों दिशा में, जगमग जगमग हो जग सारा |

नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी, नमन हमारा ||

शीतल, मलय सुवासित नंदन वन सा मह मह महके भारत |

कोकिल सा कूके इस जग में खग सा चह चह चहके भारत |

फटे शत्रुओं पर बन घातक ज्वाला भक् भक् भभके भारत |

शौर्य, तेज का तीक्ष्ण हुताशन बनकर दह दह दहके भारत |

तड तड टूटे सारे बंधन जीर्ण शीर्ण हो सारी कारा |

नवल वर्ष के नव प्रभात को विनत हमारी नमन हमारा ||

शेष फिर कभी वंदे भारत मातरम

मनोज कुमार सिंह मयंक

एक हिंदू आतंकवादी

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें